जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में अंतर

Written by Pawan Mishra

जैसा की आप सब जानते हैं हमारे देश भारत में 70 प्रतिशत से ज्यादा किसान है और कोई रसायनिक खेती कर रहा है तो कोई जैविक खेती कर रहा है तो कोई प्राकृतिक खेती कर रहा है

दोस्तो आपको पता होगा कि रसायनिक खेती करने से हमारे खेत की मिट्टी के साथ हमारे के स्वास्थ पर भी काफी नुकसानदायक परिणाम मिलते हैं और हमारे मिट्टी में पाए जाने वाले मित्र सूक्ष्म जीव मारे जाते हैं

अब जानते हैं जैविक खेती और प्राकृतिक खेती

जैविक खेती भी एक प्रकार से प्राकृतिक खेती की ही तरह हैं लेकिन इसकी खाद कीटनाशक लगभग चार गुणा महंगे हैं

और इस प्रकार जैविक खेती किसानों के लिए काफी महंगी पड़ती है और फसलों का अच्छा भाव ना मिलने के कारण किसानों को नुकसान होता है

प्राकृतिक खेती करने के फायदे

प्राकृतिक खेती में हमारी लागत बहुत कम आती है और फसलों की पैदावार धीरे धीरे बढ़ता जाता है इसमें हमे ज्यादातर चीजे हमारे आस पास ही मिल जाती है इसमें हमे कोई कोई नुकसान नही होता और हमारी फसल जहरमुक्त और स्वादिष्ट होते है

इसको करने के लिए जरूरी वस्तुएं

इसमें हमे एक देसी गाय और कुछ हमारे आस पास की चीजों की जरूरत होती है

गाय के गोबर गौमूत्र और किसी भी दाल का आटा गुड़ और किसी मेढ़ या पुराने पेड़ के नीचे की मिट्टी जिसमे रसायनिक खाद कीटनाशक ना पड़ा हो इसे मिलाकर हम जीवामृत बनाते हैं जो की जो कि हमारे खेत में मिट्टी की उपजाऊ बनाता है और इससे डालने से हमारे खेत में और केचुए आते हैं जो कि मिट्टी को फुल बुरा बनाते हैं और हमारे खेत की मिट्टी एकदम भुरभुरी बनाते हैं यह एक प्रकार से जामन का काम करता है

जीवामृत बनाते कि विधि

देशी गाय का गोबर 10 किलो

गौमूत्र। 5लीटर

दाल का आटा 1किलो

गुड़ 1किलो

मिट्टी 1पाव

इन सभी को एक किसी ड्रम या किसी अन्य वस्तु में मिलाकर दो सौ लीटर पानी में सुबह शाम पांच मिनट घड़ी कि दिशा में घुमावे सात दिन में ये खाद बनकर तैयार हो जाएगी

उपयोग करने की विधि

इसको खेत में पानी देने के समय या छिड़काव कर सकते हैं खाली खेत और फसलों पर इस का छिड़काव किया जा सकता है इसको महीने में दो बार देना अच्छा रहता है फिर धीरे-धीरे चल कर इसको महीने में एक बार या 21 दिन पर दे सकते हैं

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